स्ंसद की कार्यवाही शायद सांसदों के लिए राजनीति का अखाडा मात्र रह गया है। उसकी अहमियत क्या है, देश की प्रगति विकास के लिए कितनी अहम है, जनता के नजर में क्या मायने रखती है! इन सवालों का जबाब देने की आवश्यकता नही है। जनप्रतिनिधियों को इससे कोई लेना देना नही रह गया है। हां रह गया ये जरूर है कि देश हित के कार्य न होकर व्यक्तिगत अरोपों प्रत्यारोपों का केन्द्र बन रह गया है विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र का संसद भवन। सैकडों साल के राजनीतिक अनुभव वाली कांग्रेस हो या जनसंघ वाली भाजपा या फिर समाजवादी और वामपंथी विचाराधारा वाले दल सभी अपने गौरवमयी इतिहास को भुलाकर सिर्फ कौवा पंचायत बन के रह गयी है हमारे देश का सबसे बडा अंग जहां से देश की दिशा व दशा तय होती है। देश में स्वास्थ्य,शिक्षा, गरीबी उन्मूलन, सुरक्षा, रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों को छोड हमारे सांसद एक दूसरे को नीचा दिखाने का कार्य किया जा रहा है। आखिर जनता पूंछती है क्या हम इसी लिए अपना अमूल्य वोट देकर भेजा है कि सुषमा स्वराज क्यों ललित मोदी की मदद की जैसे बिना सिर पैर के मुद्दों पर बहस हो कि हमारी समस्याओं के निराकरण के लिए चुना है, ये अहम सवाल...
EK ANOKHA SACH AAP TAK