मैं भ्रष्टाचार हूँ , फिर भी शक्तिशाली हूँ,व्यापक हूँ, नस नस में समाया हूँ कहते हैं मुझको सिस्टम। मुझे मिटाने वाले ही खुद तो मिट गए ,लेकिन मुझे नही मिटा सके। ईमानदारी से मेरा मुकाबला रहता है। मेरे बिना हर काम अधूरा रहता है। लोकतांत्रिक देश में एक विशाल वट वृक्ष की तरह होती हैं,जिसकी जड़ें बहुत ही गहरी होती है। जिसका जीता जागता उदाहरण 2G स्पेक्ट्रम मामले देखा जा रहा है। इस घोटाले के चलते आई टी क्षेत्र के हजारों कर्मचारियों को सर्विस से हाथ धोना पड़ा। अधिकारियों को जेल तक की हवा खानी पड़ी। और दोषी बिना सबूत रिहा हो रहे हैं। इस मामले पर निर्णय सीबीआई अदालत के जज का कहना है कि सुबह से शाम तक सबूत का इंतजार करता रहता था लेकिन सीबीआई ने दोषियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नही दे पायी । और सबूतों के अभाव में बरी करना पड़ा। जज का ये बयान सीबीआई के कार्यशैली को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। विगत सात वर्षों से चल रही सुनवाई के दौरान जब आपको सबूत नही मिला तो किस विना पर केस दायर किया और सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंस रद्द किया गया। भारत में दूरसंचार क्षेत्र में निवेश करने वाली टेलीकॉम कम्प...
EK ANOKHA SACH AAP TAK